काम वो करो जिसमें मजा आए

बेटे के मुंह से ऐसी गहरी बात सुनकर माता-पिता की आँखें छलछला आईं, ऐसा लगा मानों उन्होंने जीवन के सार को समझ लिया हो। पिता सोफे से उठे और बेटे को गले लगा लिया।

पिटा – आज तुमने हमारी आँखें खोल दीं बेटे, तुमको पता है हम दोनों को घूमना बहुत पसंद है लेकिन कभी घूम ही नहीं पाए हमेशा तुम्हारे स्कूल की फीस, ड्रेस, कोचिंग फीस और घर की जिम्मेदारी में ही रुपये खर्च करते रहे। तुमने सही कहा बेटा –

“काम वो करना चाहिए जिसमें रूचि हो, जिसमें मजा आए रुपया बाद में अपने आप आने का रास्ता ढूंढ ही लेगा”

हम दोनों आज तक यही सोचते रहे कि अब घूमने जायेंगे तब घूमने जायेंगे पर कभी तुम्हारी स्कूल की छुट्टी नहीं हुई या फिर घर का कोई और काम आ गया

अगर आज तुम हमको यह सब नहीं बताते तो हम तो अभी भी यही करते रहते, FD तुड़वाकर कॉलेज में तुम्हारा एडमिशन करवाने की सोच रहे थे हमलोग

अब ये गलती नहीं करेंगे बेटा, आज से तुम भी वही करो जिसमें तुमको मजा आए और हम भी वही करेंगे जिसमें मजा आए, रुपया तो रास्ता बना ही लेगा

मुझे ऑफिस का काम बिलकुल पसंद नहीं, पूरे दिन कम्प्युटर पर बैठे रहो, सीनियर की डांट खाओ, काम का प्रेशर और उसके बाद भी तनख्वाह भी इतनी ही मिलती है जिसमें बस दाल-रोटी खा लेते हैं, इतना तो मैं घुमते हुए भी कमा सकता हूँ

प्रेरणा, तुम पैकिंग कर लो मैं ऑफिस में रिजाइन करके आता हूँ

बेटा तुम किसी अच्छे टूर वाले से बात कर लो मैं और तुम्हारी मम्मी सबसे पहले सिंगापुर घूमने जायेंगे

बेटा – फिर मेरा कैमरा?

पिता – कौन सा कैमरा

बेटा – जो मुझे चाहिए, फोटोग्राफी में कैरियर बनाना चाहता हूँ, बताया तो था

पिता – बेटा कैमरा तो तुम्हारे मोबाइल में भी है, उससे फोटो लेकर किसी फोटोग्राफी की एजेंसी को भेजो उनको पसंद आ गया तो तुमको हायर कर लेंगे फिर बढ़िया कैमरे भी देंगे और पूरी सुविधा भी मिलेगी

बेटा – ऐसे नहीं होता पापा, अपने पास अच्छा कैमरा होना चाहिए

पिता – अब हमारे वर्मा जी के बेटे को कलाम जी जैसा वैज्ञानिक बनना है तो उसको अपना रॉकेट थोड़े ही खरीद कर दे देंगे, योग्यता सिद्ध करनी पड़ेगी फिर कहीं ना कहीं जॉब मिल जायेगी, और दूसरी बात यह है कि तुम्हारा कैमरा खरीदने के लिए मुझे ऑफिस की वो नौकरी जारी रखनी पड़ेगी जो मुझे बिलकुल पसंद नहीं, अब तक की बात अलग थी मुझे अक्ल नहीं थी पर अब तो पता है कि “काम वो करना चाहिए जिसमें रूचि हो, जिसमें मजा आए रुपया बाद में अपने आप आने का रास्ता ढूंढ ही लेगा”

ये बात सिर्फ तुम्हारे लिए ही तो नहीं है, हमारे लिए भी है

क्यूँ प्रेरणा तुमको पूरे दिन घर के काम करना पसंद है क्या?

प्रेरणा – नहीं, मुझे भी घूमने जाने का बहुत मन है

सुना बेटा, हम तो अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए ये काम अभी तक करते आए, पर अब नहीं अब तुम फोटोग्राफी करो और अपने पैरों पर खड़े होने का रास्ता ढूंढों क्यूंकि घुमक्कड़ी से कैसे कमाना है ये तो अभी तक हम दोनों को पता नहीं

इतना कह कर पिता जी रिजाइन करने चले गए, माँ सिंगापुर के लिए पैकिंग करने चली गयीं और बेटा एक बार फिर 3-idiot ये समझने के लिए देखने बैठ गया कि उससे डायलॉग बोलने में क्या गलती हो गयी

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